राज्य में लौह शिल्पकार को योजनाओं के माध्यम से स्व-रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना, उन्नत एवं उन्नत उपकरण प्रदान करना, लौह शिल्पकार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में सहयो स्वरोजगार स्थापित करने के लिए बैंको से ऋणग्रस्त लौह शिल्पकार को राज्य शासन के योजना आवश्यक मदद करना तथा छ.ग. में लौह शिल्पकार को बढ़ावा देना तथा लौह शिल्पकार से गतिविधियों में संलग्न व्यक्तियों के रूचि को प्रोत्साहन देना।
लौह शिल्प के क्षेत्र में पंजीयन एक आवश्यक योजना है, पंजीयन के पश्चात लौह शिल्पकार विभागीय योजनाओं का लाभ ले सकेंगे। साथ ही राज्य सरकार तथा केन्द्र सरकार के विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाया जा सकेगा। साथ ही लौह शिल्प से जुड़े शिल्पियों का संख्यात्मक जानकारी एवं पंजीयन हेतु आवेदन छ.ग. लौह शिल्पकार विकास बोर्ड कार्यालय में उपलब्ध है आवेदन पत्र जमा करने के पश्चात् पंजीयन प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकेंगे।
विभिन्न विकास योजनाओं हेतु अनुदान :-
1. जॉब वर्क एवं संग्रहण :- शिल्पियों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने की दृष्टि से विभिन्न कलात्मक लौह शिल्प सामग्रियों का उत्पादन करवाया जाएगा तथा शिल्पियों द्वारा उत्पादित सामग्रियों को बोर्ड द्वारा क्रय किया जाकर एम्पोरियम के माध्यम से विक्रय किया जाएगा।
2. तकनीकी डिजाईन कार्यशाला एवं मार्गदर्शन:-
बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा एवं मांग के अनुरूप समय पर लौह शिल्प की तकनीकी डिजाईन में परिवर्तन करना आवश्यक है, जिसके लिए लौह शिल्प बाहुल्य क्षेत्रों में तकनीकी डिजाईन एवं कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा जिसमें निम्नानुसार सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएगी-
1. कार्यशालाओं व संगोष्ठी का आयोजन कर शिल्पियों को उन्नत तकनीक से अवगत कराने का प्रशिक्षण देना।
2. बाजार उपयोगी नये-नये डिजाईनें बनाने का प्रशिक्षण देना।
प्रशिक्षण योजनाः-
लौह शिल्पकार विकास बोर्ड द्वारा प्रदेश के परम्परागत / गैर परम्परागत शिल्पियों, शिक्षित बेरोजगार युवक एवं युवतियों को लौह शिल्प में प्रशिक्षण के माध्यम से रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
शासन के योजना के अनुसार प्रशिक्षण स्वरोजगार के लिए दिया जाएगा। प्रशिक्षण इस स्तर पर होगा कि लौह शिल्पी बाजार में अपने प्रतिद्वन्दियों से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हो सके। इस हेतु प्रशिक्षण को अत्यधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम 03 चरणों में आयोजित की जाएगी।
| क्र |
स्तर |
प्रशिक्षण |
समयावधि |
| 1 |
प्रथम |
बुनियादी प्रशिक्षण |
07 दिवस से 15 दिवस तक |
| 2 |
द्वितीय |
उन्नत प्रशिक्षण |
10 दिवस से 20 दिवस तक |
| 3 |
तृतीय |
तकनीकी डिजाइन कार्यशाला |
10 दिवस से 20 दिवस तक |
उपरोक्त प्रशिक्षण योजनाओं में राज्य शासन से प्राप्त बजट एवं विभागीय मापदंडो के आधार पर प्रशिक्षणार्थियों का लौह शिल्प के प्रशिक्षण के दौरान अनुदान (छात्रवृत्ति) व कच्चा माल प्रदाय किया जाएगा।
परम्परागत एवं प्रशिक्षित लौह शिल्पकारों को स्व-रोजगार हेतु औजार उपकरण अनुदान एवं कर्मशाला शेड निर्माण अनुदान, अनुसूचित जनजाति/अनूसूचित जाति/अन्य पिछड़ा वर्ग के शिल्पकारों को अनुदान योजना सुविधा प्रदान की जाएगी।
लौह शिल्पियों को राज्य स्तरीय पुरस्कार :-
लौह शिल्प की उच्च गुणवत्ता बनाये रखने हेतु " राज्य स्तरीय पुरस्कार प्रतियोगिता" का आयोजन किया जावेगा, जिसमें चयनित लौह शिल्प के निर्माणकर्ता शिल्पियों को राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
विपणन सहायता :-
1. प्रदर्शनियों के माध्यम से विक्रय :-
प्रदर्शनी के माध्यम से शिल्पियों को बाजार मांग लोकप्रिय डिजाईनों की जानकारी तथा उचित मूल्य का ज्ञान कराने के उददेश्य से शिल्प प्रदर्शनी एवं शिल्प बाजारों में अपना उत्पाद सीधे ग्राहकों को विक्रय करने हेतु आमंत्रित किया जाता है शिल्पियों को बोर्ड के प्रावधान के अनुसार यात्रा व्यय एवं निःशुल्क स्टॉल प्रदान कराई जाएगी।
2. एम्पोरियम के माध्यम से विक्रय :-
प्रदेश के लौह शिल्पियों के द्वारा उत्पादित लौह शिल्प सामग्रियों को संग्रहण के माध्यम से क्रय कर लौह शिल्प सामग्री का विक्रय एम्पोरियम के माध्यम से कराये जाने की योजना है।